yojana

  • Aug 21 2017 1:58PM

पंचायतों का होगा विकास, बदलेगी तसवीर

पंचायतों का होगा विकास, बदलेगी तसवीर

गांवों में विकास की पहली शर्त है पंचायतों को मजबूत और क्रियाशील बनाना, ताकि ग्रामीणों के मन में पंचायती राज व्यवस्था को लेकर विश्वास का भाव आ सके. पंचायतों में विकास कार्य होंगे, तो ग्रामीणों के मन में इस व्यवस्था प्रणाली के लिए संतुष्टी का भाव आयेगा. पंचायतों को क्रियाशील बनाने की शुरुआत पंचायत सचिवालय से होती है. 

पंचायत सचिवालय में कामकाज सुचारु रूप से चलने लगेगा, तो ग्रामीण अपनी समस्याओं को लेकर पंचायत सचिवालय आयेंगे और जनता भी अपने अधिकारों को समझ पायेगी. पंचायत कैसे सशक्त हो, पंचायत सुचारु रूप से अपने कर्तव्य और अधिकार का इस्तेमाल करते हुए अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को गति दे. साथ ही पंचायती राज व्यवस्था में मुखिया से लेकर वार्ड सदस्य तक की क्या शक्तियां निहित है. 

 सभी जनप्रतिनिधि अपनी शक्तियों को पहचाने और आपसी सामंजस्य के साथ कैसे दिशा और लक्ष्य के लिए कार्य करे. इस उद्देश्य से हजारीबाग जिला के पदमा प्रखंड अंतर्गत पिंडारकोन पंचायत में बीकन पंचायतों के सम्मेलन का आयोजन किया गया. 

बीकन पंचायत की सोच और कार्यप्रणाली

गैर सरकारी संस्था प्रदान ने राज्य के 15 पंचायतों का चयन बीकन पंचायतों के तहत किया है. इन पंचायतों को प्रदान के सहयोग से आदर्श पंचायत बनाया जायेगा. इसमें हजारीबाग, कोडरमा और गुमला के पंचायत भी शामिल हैं. गुमला के पांच पंचायत समेत कोडरमा और हजारीबाग के 10 पंचायतों को आदर्श पंचायत बनाने का जिम्मा प्रदान ने  उठाया है. 

कोडरमा के चांदवारा प्रखंड अंतर्गत आरा गारो पंचायत, पिपराडीह, थाम, कांको और तमाय पंचायत को आदर्श पंचायत बनाने की मुहिम में जोड़ा गया है. हजारीबाग के पदमा प्रखंड के बिहारी पंचायत के अलावा सरैया, रौमी और पिंडारकोन पंचायत को इस मुहिम में जोड़ा गया है. प्रदान के सहयोग से इन सभी पंचायतों का विकास किया जायेगा. सभी मुखिया को उनके अधिकार और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया जायेगा और उन्हें विकास कार्यों के लिए सहयोग किया जायेगा. बीकन पंचायत के तहत इन सभी पंचायतों को ऐसे आदर्श पंचायत के तौर पर विकसित किया जायेगा, जो दूसरे पंचायतों के लिए आदर्श साबित होंगे और आगे बढ़ने की राह दिखायेंगे. इन पंचायतों की कार्यप्रणाली से लेकर पंचायत भवन सब कुछ आदर्श होगा. 

बेहतर तालमेल से ही पंचायतों का विकास संभव 

गैर सरकारी  संगठन प्रदान की ओर से आयोजित  इस सम्मेलन में कोडरमा और हजारीबाग के 10  पंचायतों के मुखिया शामिल हुए. इस दौरान पंचायतों के विकास को लेकर उपस्थित  मुखियाओं ने अपने-अपने विचार रखे. मुखियाओं ने अपने पंचायत में विकास  कार्यों को लेकर लेखा-जोखा पेश करते हुए भविष्य की योजनाएं भी बतायें. साथ  ही कार्य के दौरान आनेवाली समस्याओं को भी बताया, ताकि उपस्थित अधिकारी  उसका निदान कर सके. 

मुखिया के बीच कैसे बेहतर लीडरशिप के गुण आ सके और  बेहतर कार्यप्रणाली पंचायतों में विकसित हो सके, इस पर मुखियाओं से  विचार-विमर्श किया गया. कार्यक्रम में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त  वंदना डाडेल, उप विकास आयुक्त राजेश पाठक, पुलिस उपाधीक्षक मनीष कुमार,  एसडीएम वेदवंती कुमारी, जिप सदस्य बसंत नारायण मेहता, प्रमुख विपिन मेहता,  प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी किशोर कुमार, बरही बीडीओ जीतराय मुर्मू,  प्रदान के स्टेट लीड कुमार संजय, सुकांता सरकार, अविजित मल्लिक, धीरज  कुमार, सूर्योदय नंदी, पंचायती राज विभाग के राष्ट्रीय प्रशिक्षक अजीत कुमार समेत कई लोग मौजूद थे.

वंदना डाडेल

विकास के लिए सोच में परिवर्तन लाना जरूरी

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त वंदना डाडेल ने पंचायत जनप्रतिनिधियों से उनके विचार और पंचायतों के विकास के प्रति उनकी नजरियों को जाना.

आयुक्त ने कहा कि पंचायतों में आधारभूत संरचनाओं को लेकर जो समस्याएं हैं, उसे दूर करने का प्रयास जारी है. जिन पंचायत जनप्रतिनिधियों के जो संसाधन मौजूद हैं, उसे लेकर ही कार्य शुरु करें. एक बार चीजें पटरी पर आ जायेगी, तो फिर समस्या नहीं होगी. उन्होंने कहा कि विकास के लिए सोच में परिवर्तन लाना होगा. परिवर्तन तभी आता है, जब हमारी सोच बदलेगी. हमारे पंचायत का एक-एक व्यक्ति हमारे लिए मैनपावर है. 

कमियों को सूचीबद्ध कर इसे दूर करने का हो रहा प्रयास : कामाख्या सिंह

पिंडारकोन पंचायत के मुखिया कामाख्या कुमार सिंह ने कहा कि धीरे-धीरे उनके पंचायत की तसवीर बदल रही है. पंचायत सचिवालय में सुविधाएं बहाल हो रही है. पहले ग्रामसभा सशक्त नहीं थी, लेकिन अब लोगों की सोच में बदवाल आया है. पहले की अपेक्षा अब बैठकों में ग्रामीण शिरकत कर रहे हैं. 

अपनी समस्याओं के साथ-साथ अपने विचार भी रखते हैं. पिंडारकोन पंचायत में सात गांव है. हर गांव में बैठकों का आयोजन किया जाता है. पंचायत सचिवालय में पंचायत के कार्यों को दीवार लेखन के माध्यम से बताया गया है. साथ ही सभी पंचायत जनप्रतिनिधियों के फोन नंबर अंकित किये गये हैं, ताकि ग्रामीणों को पूरी जानकारी मिल सके. पंचायत सचिवालय में नोटिस बोर्ड भी लगाया गया, जहां समय-समय पर सूचनाएं प्रेषित की जाती है. 

शिकायत पेटी भी पंचायत सचिवालय में लगायी गयी है, जहां पर ग्रामीण अपनी लिखित शिकायत जमा कर सकते हैं. मुखिया ने बताया कि सभी गांवों में जो बैठकें आयोजित की गयी, उन बैठकों के माध्यम से पंचायत की कमियों और समस्याओं को सूचिबद्ध किया गया और उन समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया जायेगा. मूल रूप से तीन समस्याओं को पहले छह महीने में दूर करने का प्रयास किया जायेगा. मुखिया ने बताया कि महिला सशक्तीकरण, जागरूकता और शिक्षा में सुधार लाना उनकी पहली प्राथमिकता है. जल्द ही इस कार्य को पूरा कर लिया जायेगा, क्योंकि महिलाएं सशक्त होगी. लोग जागरूक होंगे और शिक्षा में सुधार आयेगा, तो पंचायत में खुद-ब-खुद विकास शुरू हो जायेगा.

सोच बदलने से विकास संभव : लक्ष्मण

जयनगर प्रखंड अंतर्गत तमाई पंचायत के मुखिया लक्ष्मण यादव कहते हैं कि पंचायतों में विकास के लिए सबसे पहले सोच बदलने की जरूरत है, क्योंकि बिना सोच बदले विकास संभव नहीं है. लोगों की सोच बदलनी होगी. उनके मन में यह विश्वास पैदा करना होगा कि सरकार की योजनाएं आमलोगों के कल्याण के लिए है. लोग उन योजनाओं का सही लाभ उठाएं. अपने केरल दौरे के अनुभव का जिक्र करते हुए लक्ष्मण यादव कहते हैं कि केरल के पंचायतों से उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला है. वहां के पंचायतों में कार्य होता है जो दिखता है. 

लोग भी जागरूक हैं और चीजों को समझते हैं. आंगनबाड़ी में पोषाहार मिलनेवाला जच्चा-बच्चा स्वास्थ्य पोषाहार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत की महिलाएं पोषाहार युक्त भोजन को खाने से परहेज करती है, जबकि केरल में महिलाएं उस खाने को खाकर तंदुरूस्त रहती है. महिलाएं इस बात को लेकर जागरूक नहीं है. 

पंचायत समिति बने क्रियाशील : धीरज

कोडरमा जिला अंतर्गत चांदमारा प्रखंड के पिपराडीह पंचायत के मुखिया धीरज कुमार कहते हैं कि लोगों के जागरूक होने से उनके पंचायत क्षेत्र में विकास दिखने लगा है. पंचायतों के अधीन जितनी भी समितियां हैं, उन सभी को क्रियाशील किया जा रहा है. लगातार बैठकें आयोजित होती है. 

सभी पंचायत जनप्रतिनिधियों के विचार लिये जाते हैं, जिससे समस्याओं को समझते हुए प्रथामिकता के आधार पर पंचायत क्षेत्र में विकास का खाका तैयार किया जा सके. पंचायत सचिवालय ने भी कार्य करना शुरू कर दिया है. 

पंचायत क्षेत्र में भ्रमण के दौरान राशि भी खर्च होती है, लेकिन इसकी राशि सरकार की ओर से मुहैया नहीं करायी जाती है, इस पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए.  पंचायत क्षेत्र में पीडीएस सिस्टम को लेकर मिल रही शिकायतों को भी उन्होंने कार्यक्रम में रखा. साथ ही कहा की उनके क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है, जिसे दूर किया जाये. 

फुटबॉल मैच के जरिये महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा 

कार्यक्रम के शुरुआत में बालिका फुटबॉल मैच का आयोजन हुआ. दो दिवसीय फुचबॉल मैच का आयोजन पिंडराकोन ग्राम पंचायत की ओर से किया गया. इस मैच में अलग-अलग स्कूलों के 10 से 14 वर्ष की 169 छात्राओं ने भाग लिया. पंचायत के मुखिया कामाख्या कुमार सिंह ने कहा कि इस फुटबॉल मैच की पीछे का मूल उद्देश्य महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है. अगर बच्चियां इस तरह से खेल में आगे आयेगी, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा.

बैठकों से बदल रहा विकास का स्वरूप : पुष्पा देवी

कोडरमा जिले के चांदमारा प्रखंड अंतर्गत हाम पंचायत की मुखिया पुष्पा देवी कहती हैं कि उनके पंचायत में हर सप्ताह कार्यकारिणी की बैठक आयोजित होती है.

सरकारी कर्मचारी भी अब बैठकों में शामिल हो रहे हैं और लोगों की समस्याओं से अवगत हो रहे हैं. सभी पंचायत जनप्रतिनिधि विकास को लेकर जागरूक हो रहे हैं और विकास में अपने भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं. पंचायत सचिवालय में ही अब प्रज्ञा केंद्र खुला है. पंचायत सचिवालय से ही अब आय, आवासीय, जाति प्रमाण पत्र निर्गत किये जा रहे हैं. पूरे पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई को लेकर लोगों को बैठकों के माध्यम से जागरूक किया जा रहा है. 

लोग साफ-सफाई को लेकर जागरूक भी हो रहे हैं. जल्द ही हाम पंचायत खुले में शौच से मुक्त हो जायेगा. मुखिया कहती हैं कि अपने पंचायत के विकास को लेकर कई योजनाएं है, जिसे  अपने सहयोगियों की मदद से धरातल पर उतारने का प्रयास करेगी. पानी को लेकर हाम पंचायत में बहुत समस्याएं हैं. इस संबंध में मुखिया ने उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त के समक्ष रखा, जिस पर उन्हें हरसंभव सहयोग का  आश्वासन मिला.