yojana

  • Aug 21 2017 2:00PM

पंचायती राज ने बदली ढेंगुरा की सूरत

पंचायती राज ने बदली ढेंगुरा की सूरत
हजारीबाग जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित ढेंगुरा पंचायत क्षेत्र में बदलाव देखने को मिल रहा है. पंचायत के सभी चार गांवों में पीसीसी सड़क बनाये गये और शेष का निर्माण कार्य चल रहा है. 
 
गंदा पानी सड़कों पर नहीं बहे, इसके लिए नालियों का भी निर्माण किया जा रहा है. पंचायत के 60 फीसदी किसान खेती पर आश्रित हैं. टमाटर उत्पादन के लिए यह पंचायत आसपास के गांवों में जाना जाता है. पहले बरसात के मौसम में पंचायत के गांवों में डायरिया की काफी शिकायत होती थी, लेकिन अब पंचायत के ग्रामीण चापाकल का पानी पीते हैं, जिसके कारण अब यह शिकायत बहुत हद तक कम हो गयी है. साफ-सफाई को लेकर लोग जागरूक हुए हैं और शौचालय निर्माण का कार्य भी हो चुका है. 
 
 ढेंगुरा पंचायत को खुले में शौच से मुक्त के लिए जल्द ही ओडीएफ घोषित किया जायेगा. जंगल और नक्सल प्रभावित ढेंगुरा पंचायत का एक सुदूर गांव परहरिया तक विकास की किरण पहुंच रही है. इस गांव में पेयजल के लिए सौर ऊर्जा द्वारा संचालित पानी की टंकी लगायी गयी है. 
पूरे पंचायत में यह बेहतर बदलाव का संकेत है. पंचायत के अंतर्गत आनेवाले चार राजस्व गांवों में परहेरिया, दामोडीह, सिरसी और ढेंगुरा है. पंचायत के अंदर आठ टोला भी है. कुल 17 वार्ड इस पंचायत में हैं. करीब 30 फीसदी जंगलों से घिरे इस पंचायत की आबादी 9000 से ज्यादा है. 
 
मूलभूत सुविधाओं में बदलाव : ढेंगुरा पंचायत में मूलभूत सुविधाओं को लेकर सुधार हुआ है. एक वक्त था, जब पंचायत से जिला मुख्यालय को जोड़ने के लिए सड़क भी नहीं थी, पर अब पक्की सड़क बन गयी है. 
 
कोनार नदी पर बना पुल भी टूट गया था, जिससे ग्रामीणों को जिला मुख्यालय जाने में काफी कठिनाई हो रही थी, लेकिन अब सब बन चुका है. पंचायत में कई गांवों को जोड़ने के लिए पक्की सड़क बनी है. सभी पक्की सड़कें आरइओ के द्वारा बनायी गयी है. पंचायत के सभी गांवों में 12 पीसीसी सड़कें बनायी गयी है. साथ ही नाली का निर्माण भी हो रहा है. 
 
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 88 लाभुकों के िलए आवास पास कराये गये हैं. इंदिरा आवास योजना के तहत कई लाभुकों को इसका लाभ भी मिल भी चुका है. पंचायत के उप मुखिया मो खुर्शीद बताते हैं कि विकास की रोशनी अब गांवों तक पहुंच रही है और जन भागीदारी से विकास भी हो रहा है. शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था पूरे पंचायत में हुई हैं. पूरे पंचायत के लोग अब चापाकल का ही पानी पीते हैं
शिक्षा और स्वास्थ्य
 
ढेंगुरा पंचायत में प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत आंगनबाड़ी केंद्रों से ही हो जाती है. गांव के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र में जाते हैं. प्राथमिक शिक्षा के लिए पंचायत में स्कूलों की संख्या पर्याप्त है. मुखिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रयास से लगातार गांवों में अभियान चलाया जाता है, जिससे इस पंचायत में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या काफी कम हो गयी है. 
 
पंचायत क्षेत्र में हाइस्कूल की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बच्चों को दूर जाना पड़ता है. फिर भी शिक्षा के क्षेत्र में धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में पंचायत में काफी बदलाव हुआ है. ढेंगुरा पंचायत में स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र दोनों है. दोनों ही केंद्रों पर डॉक्टर और नर्स उपस्थित रहते हैं. इसके ठीक उलट बिरहोरो की बस्ती बिरहोर टाडा में एक अस्पताल बना है, लेकिन यह अस्पताल भवन सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है. इस अस्पताल में डॉक्टर और नर्स आते भी नहीं हैं. 
 
कृषि, सिंचाई के साधन और रोजगार
 
ढेंगुरा पंचायत की 60 फीसदी आबादी खेती पर निर्भर है. टमाटर उत्पादन को लेकर ढेंगुरा की खास पहचान है. अपने खेतों में अच्छे उत्पादन से यहां के किसान काफी खुश हैं. सिंचाई के लिए किसान अभी भी पारंपरिक संसाधनों पर ही निर्भर हैं. कोनार नदी यहां के किसानों की जीवन-रेखा है. 
 
कोनार नदी का पानी पाइप से किसान अपने खेतों तक पहुंचा कर खेती करते हैं. कुछ किसान सिंचाई के लिए कुओं पर भी निर्भर हैं. डोभा निर्माण भी पंचायत में कराया गया है. कोनार नदी से इतनी अच्छी सिंचाई की सुविधा के बावजूद आज तक इस नदी पर चेकडैम नहीं बनाया जा सका है. रोजगार की बात करें, तो बाकी 40 फीसदी लोग मजदूरी करते हैं. कुछ सरकारी नौकरी में हैं. मनरेगा के तहत मजदूरों को मजदूरी के भुगतान में देरी होती है और मेहनताना भी कम मिलता है, इसलिए अधिकतर मजदूर शहर में जाकर मजदूरी करते हैं.
 
पंचायत में सकारात्मक बदलाव हुआ है : मुिखया
 
मुखिया ललिता देवी मानती है कि पंचायत में 70 फीसदी विकास के कार्य हुए हैं. अभी और बदलाव किया जाना शेष है. मुखिया कहती हैं कि ग्रामीणों में भी जागरूकता आयी है. साफ-सफाई को लेकर काम हुआ है. शौचालय निर्माण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी काम हुआ है. कुल मिला कर कहें, तो पंचायत में सकारात्मक बदलाव हुआ है, जो दिख रहा है.
 
बदल रहा है कुद पंचायत
 
हजारीबाग शहर से सटे कुद पंचायत में बदलाव नजर आने लगा है. पंचायत क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति पर विशेष जोर देते हुए कई कार्य किये गये हैं. पहले क्षेत्र में पीने के पानी को लेकर कई समस्याएं थीं. लोगों को काफी दूर से पानी लाने को बाध्य होना पड़ता था. पंचायत जनप्रतिनिधियों की पहल पर पंचायत क्षेत्र में छह वाटर टैंक लगाये गये हैं, जो सौर ऊर्जा से संचालित है. इससे पीने के पानी की समस्या बहुत हद तक कम हुई है और ग्रामीणों को पीने के लिए शुद्ध पानी मिल रहा है. 
 
इस पंचायत में दो गांव कुद और रेवाली है. इन दोनों गांवों में कुल 10 वार्ड है. आबादी लगभग पांच हजार से ज्यादा है. कुद पंचायत में सड़कें भी बनी है. अब तक रेवाली और कुद दोनों गांवों में करीब दो हजार फीट रोड का निर्माण हो चुका है. सड़कों के बन जाने से लोगों को आवागमन में काफी सुविधा हो रही है. 
 
स्वच्छ भारत मिशन पर जोर : खुले में शौच से मुक्त यह पंचायत ओडीएफ घोिषत हो गया है. ओडीएफ पंचायत घोषित होने से लोगों में जागरूकता आयी और उनके नजरिये में बदलाव भी आया है. पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई पर भी विशेष कार्य करने की जरूरत है. नालियों का निर्माण नहीं हो पाया है, इसके कारण नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहता है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि मुखिया धीरज कुमार बताते हैं कि कई बार ग्रामीणों को जागरूकता अभियान के माध्यम से जागरूक करने का प्रयास किया गया है.
शिक्षा और स्वास्थ्य : इस पंचायत में शिक्षा पर काफी ध्यान दिया गया है. यही कारण है कि इस पंचायत में साक्षरता दर अधिक है. पंचायत के बच्चे, बूढ़े, महिला व पुरुष सभी अपना हस्ताक्षर करना जानते हैं. 
 
पंचायत में लोक शिक्षा केंद्र चलता है. इसके माध्यम से ग्रामीणों को साक्षर करने की कोशिश की जा रही है. गांववालों के इसी मेहनत और लगन के कारण आज यह पंचायत साक्षर पंचायत घोषित हो चुका है. शहर नजदीक होने के चलते अधिकतर बच्चे पढ़ने के लिए शहर जाते हैं. इलाके में लड़कियां शिक्षा के क्षेत्र में काफी आगे है. पंचायत में एक भी हाइस्कूल नहीं है. छात्रों को निजी स्कूलों में पढ़ने को बाध्य होना पड़ता है. स्वास्थ्य की बात करें, तो पूरे पंचायत में एक भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. शहर नजदीक होने के कारण ग्रामीण इलाज के लिए शहरों की ओर रूख करते हैं. 
 
कृषि और रोजगार : कुद पंचायत के अंतर्गत हजारीबाग रेलवे स्टेशन पड़ता है. स्टेशन के पास होने के कारण गांव की अधिकतर जमीन बिक चुकी है और लोग खेती से दूर हो चुके हैं. पंचायत के अधिकतर ग्रामीण रेलवे स्टेशन या शहर में जाकर मजदूरी करते हैं. वृद्धा पेंशन और विधवा पेंशन को लेकर काम हो रहा है, जरूरतमंद लोगों तक बीपीएल और एपीएल कार्ड का लाभ भी पहुंच रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभुकों के लिए 19 आवास स्वीकृत किये गये हैं, जिनका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है. 
 
बदलाव की  हुई शुरुआत : धीरज
 
मुखिया धीरज कुमार कुद पंचायत का ओडीएफ पंचायत घोषित होना एक बड़ी सफलता मानते हैं. वे कहते हैं सही मायने में अब बदलाव की शुरूआत हो चुकी है. पंचायत के लोग जागरूक हो रहे हैं और आत्मनिर्भर होने को प्रयासरत हैं. 
 
मुखिया मानते हैं कि साफ-सफाई में लोगों को और जागरूक होने की जरूरत है. शिक्षा में हुए बदलाव को मुखिया बड़ी उपलब्धि मानते हैं, क्योंकि यह पंचायत पूर्ण रूप से साक्षर पंचायत घोषित हो चुका है. यहां के 100%लोग हस्ताक्षर करते हैं. मुिखया उम्मीद जताते हैं कि इससे बेहतर बदलाव की उम्मीद अब कर सकते हैं, क्योंकि ग्रामीणों ने बदलाव का मन बना लिया है.