yojana

  • Oct 19 2016 12:48PM

साधारण लोगों के बड़े सपने

साधारण लोगों के बड़े सपने
चंदन मछुआ. बिल्कुल साधारण युवक है. लेकिन अपने समाज के लिए उसकी अांखों में बहुत बड़े-बड़े सपने हैं. 30 साल के चंदन अपने चार-भाई बहनों में सबसे छोटे हैं. भूख व गरीबी से लड़कर किसी तरह 2008 में बुंडू (रांची-टाटा हाइवे के दायीं ओर स्थित प्रखंड) के पीपीके कालेज से ग्रेजुएशन किया. फिर कोलकाता में रहकर एडवांस डिप्लोमा इन कंप्यूटर हार्डवेयर की पढ़ाई की. फिलहाल चंदन रांची में एक वाहनों को प्रदूषण रहित होने का प्रमाण पत्र जारी करने वाली एक फ्रेंचाइजी में कंप्यूटर आपरेटर का काम करता है और साथ में ग्राफिक्स डिजाइनिंग का काम सीख रहा है. चंदन से मिलकर सब कुछ साधारण लगेगा. बिल्कुल सामान्य युवक, जो खुद की रोजी-रोटी के लिए लड़ रहा है. लेकिन एेसा नहीं है. 
 
चंदन के सपनों की कहानी
 
बुंडू जहां चंदन रहता है. वहां करीब 99 एकड़ में फैला एक बहुत बड़ा तालाब है. इस तालाब से ही चंदन के सपने जुड़े हैं. चंदन के सपनों में वह अकेला नहीं. उसका पूरा परिवार है. मछुआ कॉलोनी का हर घर है. बुंडू है. जिसकी बेहतरी के लिए वह रात-दिन भाग-दौड़ कर रहा है. रविवार को चंदन अपने गांव में होता है. रविवार का पूरा दिन उसका मछुआ मोहल्ले के बच्चों के लिए होता है. बच्चों को वह मुफ्त में कंप्यूटर, अंग्रेजी और गणित पढ़ाता है. बुंडू कस्बाई इलाका है. रोजगार के साधन सीमित हैं. 
 
इसलिए रोजगार के लिए पलायन यहां आम बात है. हरेक वर्ष बहुतायत लोग रोजी रोटी के लिए पलायन कर ईंट के भट्ठों में या रांची में कुली का काम करते हैं. चंदन कहते हैं- बचपन से ही हमलोगों ने गरीबी को जिया है. होश संभालने के बाद लोगों का पलायन कर शोषित होना और जमा पूंजी शराब में डुबाकर मरना काफी चुभन देता रहा है. उसे हमेशा ऐसा लगता रहा कि कब गांव में लोगों को रोजगार मिलेगा और उनके हालात में सुधार होगा. पिछले साल सितंबर में गांव वालों को जानकारी मिली कि मत्स्य विभाग तालाब की सफाई कर वहां पर मछली पालन का काम शुरू करना चाहता है.
 
 पहले गांववालों को विश्वास नहीं हुआ. उन्हें लगा कि हर बार की तरह उन्हें आश्वासन दिया जाएगा और यहां कुछ हो ही नहीं हो सकता है. इस समय चंदन सामने आया. उसने लोगों को समझाया कि एक प्रयास करने में कोई बुराई नहीं है. शायद इस बार हमारे किस्मत में कुछ बेहतर लिखा है. उसका प्रयास रंग लाया और जिस 99 एकड़ के तालाब की सफाई का लक्ष्य विभाग ने चार महीने का रखा था, उसकी सफाई गांव के 225 लोगों ने सामूहिक प्रयास से सिर्फ 23 दिन में कर दिया. फिर विभाग की ओर से मिले चार केज में मछली पालन शुरू हो गया. ये तो बस एक छोटी सी पहल है. चंदन इस तालाब में 20 से 25 केज लगवाने की कोशिश कर रहे हैं और जिससे 250 परिवार का भरण पोषण आसानी से किया जा सकता है. इतने केज लगा कर साल में 12 लाख मछली का पालन किया जा सकता है. जिससे साल में न्यूनतम डेढ़ से दो करोड़ की कमाई की जा सकती है. चंदन बताते हैं कि तालाब तो मछुवारों के लिए एटीएम है. जब पैसे की जरूरत हो, मछली पकड़ो और बाजार में बेच दो. हाथों-हाथ नकदी मिल जाती है. वो ये भी मानते हैं कि सरकार की तरफ से लोगों के हालात बदलने के लिए शुरुआती कोशिश की गयी है, लेकिन इसमें और तेजी लाने की जरूरत है ताकि लोगों के उत्साह को जिन्दा रखा जा सके.
 
सपनों के आगे चुनौतियां
 
तालाब के निकास में चेक डैम नहीं है. जब भी जोरदार बारिश होती है. मछलियों के बहकर निकल जाने का खतरा पैदा हो जाता है. मछलियों के बीज के लिए नर्सरी नहीं है. बड़ा तालाब के आसपास सात सरकारी तालाब है, जहां मछलियों के बीज के लिए नर्सरी आसानी से बन सकती है, लेकिन सरकारी नीति के चक्कर में यह काम नहीं हो पा रहा है. मछलियों में होने वाले संंक्रमण से बचाव का कोई उपाय नहीं होने के कारण उसके सपनों में कभी भी पलीता लग सकता है. योजना होने के बाद भी 225 में सिर्फ 10 परिवार को ही मछुआ आवास और वेद व्यास आवास योजना के तहत पक्का मकान मुहैया कराया जा सका है. सबसे बड़ी समस्या तो तालाब पर हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगाना. 
 
भविष्य की योजना
 
भौगोलिक रूप से बुंडू के तीन किलोमीटर पहले सूर्य मंदिर है और आगे तमाड़ में प्रसिद्ध देवरी मंदिर. आज लाखों की संख्या में सैलानी और दर्शनार्थी इन मंदिरों के दर्शन को आते हैं और बुंडू के इस बड़े तालाब का सही तरीके से रख रखाव किया जाये तो ये एक पर्यटन स्थल के रूप में भी आसानी से विकसित हो सकता है. इससे इलाके की तसवीर और तकदीर दोनों बदल जायेगी. लोगों के आर्थिक हालात में भी सुधार हो जायेगा और रोजगार के अवसर बढ़ जायेंगे. 
 
चंदन की जिंदगी के सबक
 
जरा, सोचिए. साधारण युवक चंदन क्या सोच रहा है. करीब दो करोड़ रुपये की सालाना कमाई. 250 परिवारों के लिए भरण-पोषण का इंतजाम. पलायन से मुक्ति. इलाके का विकास. सरकारी मदद तो है लेकिन नाकाफी है. इसके बावजूद आगे बढ़ने की जिद और हौसला उसके पास काफी है. जब चंदन एेसा सोच या कर सकता है, तो हम क्यों नहीं.